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Tuesday, 11 April 2017
Sunday, 12 February 2017
माता वैष्णो देवी कटरा के दर्शन करने जाने वाले यात्रियों को मिली एक और ट्रेन की सुविधा
पानीपतसे माता वैष्णो देवी कटरा में दर्शन करने जाने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे मंडल ने 04401/04402 आनंद विहार टर्मिनल श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस नई ट्रेन चलाने का एलान किया है। यह ट्रेन 3 अप्रैल से 1 जुलाई तक समर स्पेशल के रूप में चलेगी। पानीपत से यात्रियों को यह ट्रेन अंबाला कैंट में जाकर पकड़नी होगी। वैसे तो इससे पहले भी नियमित चल रही श्री शक्ति एक्सप्रेस ट्रेन भी यात्रियों को अम्बाला कैंट जाकर ही पकड़नी पड़ती है।
Saturday, 30 April 2016
जय माँ बनभौरी ( माता भ्रामरी देवी )
जय माँ बनभौरी ( माता भ्रामरी देवी )ऐतिहासिक शक्तिपीठ माता बनभौरी धाम में माता भ्रामरी देवी की सच्चे मन से मांगी गई हर श्रद्धालु की मन्नत पूरी करती है। बनभौरी धाम में भक्तजन मन्नतों का धागा बांध कर मुरादें मांगते हैं तथा उनके पूरा होने पर फिर सिर झुकाने व दरबार में हाजिरी लगाने मां के चरणों में आते हैं
देवताओं की सहायता के लिए देवी ने अनेक अवतार लिए। भ्रामरी देवी का अवतार लेकर देवी ने अरुण नामक दैत्य से देवताओं की रक्षा की। इसकी कथा इस प्रकार है- पूर्व समय की बात है। अरुण नामक दैत्य ने कठोर नियमों का पालन कर भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए और अरुण से वर मांगने को कहा। अरुण ने वर मांगा कि कोई युद्ध में मुझे नहीं मार सके, न किसी अस्त्र-शस्त्र से मेरी मृत्यु हो, स्त्री-पुरुष के लिए मैं अवध्य रहूं और न ही दो व चार पैर वाला प्राणी मेरा वध कर सके। साथ ही मैं देवताओं पर विजय प्राप्त कर सकूं।
ब्रह्माजी ने उसे यह सारे वरदान दे दिए। वर पाकर अरुण ने देवताओं से स्वर्ग छीनकर उस पर अपना अधिकार कर लिया। सभी देवता घबराकर भगवान शंकर के पास गए। तभी आकाशवाणी हुई कि सभी देवता देवी भगवती की उपासना करें, वे ही उस दैत्य को मारने में सक्षम हैं। आकाशवाणी सुनकर सभी देवताओं ने देवी की घोर तपस्या की। प्रसन्न होकर देवी ने देवताओं को दर्शन दिए। उनके छह पैर थे। वे चारों ओर से असंख्य भ्रमरों (एक विशेष प्रकार की बड़ी मधुमक्खी) से घिरी थीं। उनकी मुट्ठी भी भ्रमरों से भरी थी।
भम्ररों से घिरी होने के कारण देवताओं ने उन्हें भ्रामरीदेवी के नाम से संबोधित किया। देवताओं से पूरी बात जानकार देवी ने उन्हें आश्वस्त किया तथा भ्रमरों को अरुण को मारने का आदेश दिया। पल भर में भी पूरा ब्रह्मांड भ्रमरों से घिर गया। कुछ ही पलों में असंख्य भ्रमर अतिबलशाली दैत्य अरुण के शरीर से चिपक गए और उसे काटने लगे। अरुण ने काफी प्रयत्न किया लेकिन वह भ्रमरों के हमले से नहीं बच पाया और उसने प्राण त्याग दिए। इस तरह देवी भगवती ने भ्रामरीदेवी का रूप लेकर देवताओं की रक्षा की।
Saturday, 16 January 2016
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